बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं प्रशिक्षण देना हर मां बाप पर फर्ज़ है । औलाद को सभ्य बनाना बहुत बड़ा उपहार है । अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद स ० अ ० व ० ने फरमाया औलाद के लिये अच्छे अदब तौर तरीके से बढ़कर और कोई उपहार नहीं ( तिर्मिज़ी ) पैगम्बर हज़रत मुहम्मद स ० अ ० व ० ने फरमायाः आदमी का अपनी औलाद को अदब सिखाना एक साअ सदका करने से बेहतर है । इन दोनों हदीसों BAN से मालूम हुआ कि अपनी औलाद को अदब सिखाना सबसे बड़ा उपहार है । इसलिये हमारे लिये ज़रूरी है कि हम अपनी औलाद के बारे में फिक्र करें अच्छा अदब और बेहतर शिक्षा के लिये चाहे जितनी रकम खर्च करनी पड़े । बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं प्रशिक्षण देना हर मां बाप पर इमाम रबीआ रह ० एक महान इस्लामी विद्वान प्रसिद्ध मुहद्दस गुज़रे हैं , यह इमाम मालिक रह ० के अध्यापक थे । बचपन में इमाम रबीआ के पिता किसी सफर पर चले गये , सफर पर जाने से पहले उन्होंने इमाम रबीआ रह ० की माँ को तीस हज़ार अशरफियां भी देकर गये थे हज़रत इमाम रबीआ की मां ने इन अशरफियों को अपने बेटे की अच्छी तालीम पर खर्च कर दिया । जब दिया । जब हजरत इमाम रबीआ रह ० पढ़ लिख कर फारिग हो गये तो इनके पिता एक एक जमाने के बाद सफर से घर वापस हुये , उन्होंने अपनी बीवी से इ अशरफियों के बारे में पूछा कि वह ३० हज़ार अशरफियां कहां हैं बीवी ने जवाब दिया कि उन अशरफियों को बहुत संभाल कर रखा है । इमाम रबीआ के पिता जब मस्जिद में आये तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा हदीस पढ़ा रहा है और मुहदसों रहे हैं और लोग उनको अपना गुरू ( इमाम ) बनाये हुये हैं , यह दृष्य देखकर वह काफी प्रसन्न हुये जब घर वापस आये तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने ३० हज़ार अशरफियां बच्चे की तालीम व तबियत ( शिक्षा एवं दीक्षा ) पर खर्च कर डाला । आपने दर्स
अपने लड़के को देख लिया है । अब आप बताइये कि ३० हजार अशरफियां कीमती हैं या इल्म की वह दौलत जो लड़के को हासिल हुयी है । इमाम रबीआ पिता ने कहा कि इस सम्मान के मुकाबले में में इन अशरफियों की कया हकीकत है तुमने अशरफियों को बर्बाद नहीं किया ( तारीख खतीब भाग -८ ) यह वाकआ हर बाप के लिये एक आदर्श और पाठ है । हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम भी अपने कासिद से अपने बेटे के बारे में पूछा था कि व किस हाल में है तो कासिद ने जवाब दिया था कि वह मिस्र बादशाह हैं हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम ने कासिद से कहा कि मैंने इसके बारे में नहीं पूछा है बल्कि मेरा मतलब यह है कि उसकी दीनी जिन्दगी कैसी है इसलिये हर मां बाप को चाहिये कि अपनी नई पीढ़ी के बारे में फिक्र करें और उसको दीनी तालीम व तबियत से सुसज्जित करें । इसलाहे

