राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका

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नारी हमेशा राष्ट्र हितों के लिए पुरुषों का साथ लेने के लिए आगे आई है. चाहे प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन की बात हो या सभी राष्ट्रीय आन्दोलन में नारियों की भूमिका की बात हो, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण के लिए कदम बढ़ाया हैं. आज हम भारत के राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के योगदान पर निबंध बता रहे हैं. राष्ट्र निर्माण में नारी के रूप में भी पढ़ सकते हैं. और ही है जो हर तरह से मदद की है।और मैं मानता हु की हर जगह औरत ने मर्द के साथ मिल कर काम की है। मैं ने आपने आसपास भी देखा है की महिला ने अच्छी कार्य की है।
कौन भूल सकता है माता जीजाबाई को, जिसकी शिक्षा-दीक्षा ने शिवाजी को महान देशभक्त और कुशल योद्धा बनाया। कौन भूल सकता है पन्ना धाय के बलिदान को पन्नाधाय का उत्कृष्ट त्याग एवं आदर्श इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। वह उच्च कोटि की कर्तव्य परायणता थी। अपने बच्चे का बलिदान देकर राजकुमार का जीवन बचाना सामान्य कार्य नहीं। हाड़ी रानी के त्याग एवं बलिदान की कहानी तो भारत के घर-घर में गायी जाती है। रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्ताना, पद्मिनी और मीरा के शौर्य एवं जौहर एवं भक्ति ने मध्यकाल की विकट परिस्थितियों में भी अपनी सुकीर्ति का झण्डा फहराया। कैसे कोई स्मरण न करे उस विद्यावती का जिसका पुत्र फांसी के तख्ते पर खड़ा था और मां की आंखों में आंसू देखकर पत्रकारों ने पूछा कि एक शहीद की मां होकर आप रो रही हैं तो विद्यावती का उत्तर था कि ‘मैं अपने पुत्र की शहीदी पर नहीं रो रही, कदाचित् अपनी कोख पर रो रही हूं कि काश मेरी कोख ने एक और भगत सिंह पैदा किया होता, तो मैं उसे भी देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर देती।’ ऐसा था भारतीय माताओं का आदर्श। ऐसी थी उनकी राष्ट्र के प्रति निष्ठा।

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