इस कहानी मे, आजादी से बढ़कर कोई सुख नही है।

ahlawat

एक बहुत अच्छा राजा था । उसके राज्य में प्रजा सुखी थी । किसी प्रकार का कोइ नहीं था । लोग सुख-चैन से रहते थे और अपने राजा की प्रशंसा करते थे । राजा पशु पक्षियो से बहुत ही प्यार करते है। उसके महल में कई हाथी और घोड़े थे । वह स्वयं जब जानवरों के पास जाता था । उन्हें प्यार से पुचकारता सहलाता था। राजा के सोने का कमरा पहली मंज़िल पर था । उसके कमरे की खिड़की के पास आम का एक पेड़ था । राजा पलंग पर लेटे - लेटे उस पेड़ को देखता रहता था । उसे वह पेड़ अच्छा लगता था । कभी पेड़ पर नई पत्तियाँ आ जाती थीं तो कभी उस पर बौर क्य का आ जाते थे ।

कभी उस पर छोटे - छोटे आम आ जाते थे , तो कभी पूरे पेड़ पर पके हुए ब्लैकड़ों रसीले आम दिखाई पड़ते थे । उस पेड़ पर कई चिड़ियाँ भी आकर बैठती थीं । एक दिन उस पेड़ पर एक बहुत सुंदर चिड़िया आकर बैठी । उसका रंग सुनहरा था । चिड़िया गाने लगी । उसका गाना इतना मीठा था कि उसके सामने बाँसुरी की आवाज़ भी फीकी लगती थी । राजा और रानी को चिड़िया का गाना बहुत अच्छा लगा । फिर वह चिड़िया वहाँ रोज़ आने लगी । वह सवेरे शाम वहाँ आती , थोड़ी देर अपनी सुरीली आवाज में गाती फिर उड़कर चली जाती । लेकिन जिस दिन बारिश होती , तेज वायु चलती या बहुत गर्मी होती उस दिन वह चिड़िया नहीं आती । उस दिन राजा को कुछ अच्छा नहीं लगता था । वह चाहता था कि रोज़ सुनहरी चिड़िया का गाना सुने । रानी भी चाहती थी कि वह उसका गाना रोज़ सुने । राजा ने मंत्री से कहा , " मंत्री जी , जिस दिन बारिश होती है या तेज़ वायु चलती है उस दिन सुनहरी चिड़िया यहाँ नहीं आती । अगर वह चिड़िया कोई मोल नहीं है आवश्यकता को कोई भय राजमहल में ही रहने लगे , तो उसे , बारिश में नहीं भीगना पड़ेगा । क्यों न हम उसके लिए एक सोने का पिंजरा बनवा दें ? " मंत्री ने कहा , " महाराज विचार तो आपका ठीक है । पर क्या चिड़िया पिंजरे में रहना पसंद करेगी ? राजा ने कहा , लिए हम सोने का पिजरा बनवाएगें।

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