एक बार भाग्य और बुद्धि में बहस हुई। आप कहानी पढ़कर निर्णय निकाल सकते हैं।

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एक बार भाग्य और बुद्धि में बहस हो गई। भाग्य ने गर्व से सिर उठाकर कहा-‘‘ मैं बड़ा हुँ।‘‘ बुद्धि बोली -‘‘नहीं, मैं बडी हूँ।‘‘ बहस बहुत देर तक चलती रही। अंत में दोनो ने निर्णय किया कि बहस से समस्या का हल नहीं होगा; इसके लिए कुछ करके दिखाना चाहिए।
तभी उन्हें खेत में काम करता एक किसान दिखाई दिया। बुद्धि ने भाग्य से कहा-‘‘ तुम अगर इसे राजा बना दो तो मैं हार मान लूँगा।‘‘
भाग्य ने कहा -‘‘ठीक है, मैं इसे अभी राजा बनाता हूँ। भाग्य किसान के पास पहुँचा तो उसके खेत में खड़े गेहूँ की बाले मोतियों से भर गई। किसान ने एक बाल तोड़कर देखी तो उसमें मोती निकले। उसने दूसरी बाल तोडी तो उसमें भी मोती निकले। उसने मोती कभी देखे न थे, सोचा-ये कंकड़ हैं। वह सिर पकड़कर बैठ गया और बोला-‘‘हे भगवान! यह क्या हो गया ? इन कंकड़ों का क्या करूँ? साल भर की मेहनत व्यर्थ चली गई।‘‘ वह खेत के किनारे बैठकर अपने भाग्य को कोसने लगा। तभी उस देश का राजा अपने मंत्री के साथ उधर से गुजरा। उसने किसान को रोते देखा तो रूक गया। उसने किसान से रोने का कारण पूछा। किसान ने राजा को सब कुछ बता दिया। राजा ने खेत में घुसकर देखा तो यह देखकर आश्चर्य में पड़ गया कि उस खेत में मोती उगे हुए थे। राजा ने मंत्री केा एक ओर बुलाकर कहा-‘‘क्यो न हम अपनी राजकुमारी का विवाह इस किसान से कर दें। वह हमारी इकलौती संतान है। इस भाग्यशाली आदमी के साथ सुखी रहेगी।‘‘

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म्ंत्री ने भी राजा की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा-‘‘ आपका विचार उŸाम है।‘‘
अब राजा किसान से बोला -‘‘सुनो तुम यह सारी फसल काटकर राजमहल में पहुँचा दो। इसके बदले में हम तुम्हारा विवाह अपनी पुत्री से कर देंगे और बहुत-सा धन भी देगे।‘‘
किसान तुरंत तैयार हो गया इस तरह उसके खेत के सारे मोती राजमहल मे पहँुच गए। यह देखकर बुद्धि मुस्कराई तो भाग्य बोली-‘‘देखती रहो, यह राजा बनने ही वाला है।‘‘ राजा ने अपने वख्चन का पालन किया। उसने निश्चित दिन अपनी पुत्री का विवाह उस किसान से कर दिया। किसान बहुत प्रसन्न था।

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